नई दिल्ली. कांग्रेस ने मंगलवार को लोकसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र जारी किया। इसे जन आवाज नाम दिया गया है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि मैनिफेस्टो में 5 प्रमुख वादे किए गए हैं। किसानों के लिए अलग बजट लाया जाएगा। साथ ही कृषि कर्ज के डिफॉल्टरों पर फौजदारी (क्रिमिनल) मामला दर्ज नहीं होगा। राहुल ने 'गरीबी पर वार, 72 हजार' का नारा भी दिया।
राहुल ने कहा, "हम अपना मैनिफेस्टो रिलीज कर रहे हैं। यह कांग्रेस के लिए बड़ा कदम है। पिछले साल जब हमने यह शुरू किया था, तब मैंने चिदंबरम जी को दो चीजें कही थीं। मैंने उन्हें कहा था कि यह बंद कमरों में बनने वाली चीजें नहीं हैं। यह बिल्कुल सच्चा होना चाहिए। हम पिछले काफी समय से झूठ सुन रहे हैं, वो भी अपने प्रधानमंत्री से। जब हम मैनिफेस्टो के बारे में बात करते हैं या न्याय के बारे में बोलते हैं तो जनता से एक रिस्पॉन्स मिलता है।"
कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया, "हमारा निशान पंजा है और घोषणापत्र में हम पांच बड़े वादे कर रहे हैं। विश्वास कीजिए, जिस तरह हमने राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में वादे के मुताबिक 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज माफ किया, ठीक इसी प्रकार ये वादे भी पूरा करेंगे। मैं झूठे वादे नहीं करता।"
5 वादे
1. न्याय
पहली थीम न्याय की है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 15 लाख रुपए अकाउंट में डालेंगे। वो झूठ था। हमने उनकी बात पकड़ी और मैनिफेस्टो कमेटी से पूछा कि हिंदुस्तान की जनता के अकाउंट में कांग्रेस कितना पैसा डाल सकती है। उन्होंने मुझे 72 हजार नंबर दिया। गरीबी पर वार 72 हजार। एक साल में 72 हजार कांग्रेस पार्टी गरीबों के अकाउंट में सीधा डालेगी। एक साल में 72 हजार और पांच साल में 3 लाख 60 हजार। मोदीजी ने नोटबंदी और जीएसटी से जो अर्थव्यवस्था जाम की है, उसे हम वापस पटरी पर लाएंगे।
2. रोजगार
दूसरा- चिदंबरम जी ने कहा कि दो बड़े मुद्दे हैं रोजगार और किसान। 22 लाख सरकारी नौकरियां खाली पड़ी हैं। उन्हें कांग्रेस पार्टी मार्च 2020 तक भर देगी। 10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायत में कांग्रेस नौकरी देगी। मेक इन इंडिया की दुनिया में आप बिजनेस खोलना चाहते हैं। तीन साल के लिए युवाओं को बिजनेस के लिए कोई परमिशन नहीं लेनी होगी। आप लोगों को रोजगार देंगे। कांग्रेस इसके लिए दरवाजे खोलेगी।
3. किसान
हम मनरेगा में रोजगार के 150 दिन पक्के करना चाहते हैं। हमारे हिसाब से किसानों का एक अलग बजट होना चाहिए। किसानों को मालूम होना चाहिए कि उनके लिए कितना बजट दिया जाएगा और उन्हें कितना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा।
नीरव मोदी और विजय माल्या जैसे लोग लोगों का पैसा लेकर भाग जाते हैं। किसान अगर बैंकों का पैसा नहीं दे पाते तो उन्हें जेल में डाल दिया जाता है। हमने फैसला किया है कि अगर किसान पैसा न लौटा पाए तो वो क्रिमिनल ऑफेंस नहीं सिविल ऑफेंस हो।
4. शिक्षा
शिक्षा के क्षेत्र में हमने निर्णय लिया है कि जीडीपी का 6% पैसा देश की शिक्षा में दिया जाए। आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों को हम सबकी पहुंच में बनाना चाहते हैं। मोदी सरकार ने उसे हमेशा कम किया है।
5. हेल्थ सेक्टर
हेल्थ सेक्टर में मोदी सरकार एक योजना लाई है। इंश्योरेंस का पैसा प्राइवेट अस्पतालों की जेब में डाले जाएं। हम सरकारी व्यवस्थाओं को मजबूत करने का काम करेंगे। हम तय करेंगे कि गरीबों को अच्छी से अच्छी सुविधाएं मिलें।
'राफेल डील की जांच होगी'
इस बीच घोषणापत्र समिति के सदस्य बालचंद्र मुंगेकर ने कहा, "कांग्रेस के सत्ता में आने पर पहले ही दिन राफेल डील पर जांच बैठाई जाएगी। इसे भी मैनिफेस्टो में शामिल किया गया है।"
चिदंबरम की अध्यक्षता में बनी थी कमेटी
घोषणापत्र तैयार करने के लिए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की अध्यक्षता में समिति बनाई गई थी। उन्होंने कहा कि घोषणापत्र में समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। इस बार सबसे बड़ा मुद्दा बेरोजगारी है। मोदी सरकार के कार्यकाल में 4 करोड़ 70 लाख लोगों की नौकरियां गईं। घोषणापत्र तैयार करने के लिए पूरे देश से 1 लाख 60 हजार सुझाव आए।
घोषणापत्र समिति के संयोजक राजीव गौड़ा ने बताया कि घोषणापत्र बनाने के लिए हमने 20 सबकमेटी बनाईं। हमने 24 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की 60 लोकेशन कवर कीं। हमने एनआरआई से भी संपर्क किया। 12 देशों के एनआरआई से सलाह ली। कुल 121 पब्लिक कंसल्टेशन ली गईं।
भाजपा दिल्ली के लिए अलग से घोषणापत्र जारी करेगी
भाजपा की दिल्ली इकाई ने कहा है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए अलग से घोषणापत्र जारी किया जाएगा। इसमें स्थानीय मुद्दों को शामिल किया जाएगा। दिल्ली के भाजपा प्रमुख मनोज तिवारी के मुताबिक- घोषणापत्र बनाने को लेकर अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है लेकिन इसमें दिल्ली को प्रदूषणमुक्त बनाने और यमुना नदी की सफाई जैसे मुद्दे शामिल किए जाएंगे।
मनोज ने कहा कि इस घोषणापत्र में केजरीवाल सरकार के उन वादों का भी जिक्र किया जाएगा जो पूरे नहीं किए गए। मौजूदा राज्य सरकार ने दिल्ली को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए कोई काम नहीं किया और कई योजनाओं के लिए पैसा देना बंद कर दिया।
Tuesday, April 2, 2019
Tuesday, March 26, 2019
भंसाली का प्रोजेक्ट: साहिर लुधियानवी, अमृता प्रीतम के रोल में दिखेगी अभिषेक बच्चन-तापसी की जोड़ी
संजय लीला भंसाली को फ़िल्मी पर्दे पर प्रेम कहानियां दिखाने में महारत हासिल है. अब तक के करियर में उन्होंने अलग अलग प्रेम कहानियों को बड़े पर्दे पर साकार भी किया है. उनके खाते में हम दिल दे चुके सनम से लेकर बाजीराव मस्तानी, पद्मावत तक कई फ़िल्में दर्ज हैं. अब खबरे हैं कि भंसाली एक और अद्भुत प्रेम कहानी लेकर आने वाले हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भंसाली साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम की जिंदगी पर बन रही फिल्म प्रोड्यूस करने वाले हैं. फिल्म में अभिषेक बच्चन और तापसी पन्नू नजर आएंगे. बता दें कि साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम दोनों बड़े साहित्यकार हैं. उनकी प्रेम कहानी हमेशा चर्चा में रही है. भंसाली उनके अमर प्रेम को दर्शकों के बीच परोसना चाहते हैं.
मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म में अभिषेक बच्चन, साहिर लुधियानवी के रोल में नजर आएंगे. जबकि
आएंगी. लेकिन खबरें यह भी हैं कि अभी तक अभिषेक और तापसी ने फिल्म साइन नहीं किया है. हालांकि उन्हें स्क्रिप्ट पसंद है. माना जा रहा है कि स्टारकास्ट की जल्द ही औपचारिक घोषणा हो जाएगी.
बताते चलें कि भंसाली काफी समय से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. उन्होंने लेखक- निर्देशक जसमीत रीन को भी स्क्रिप्ट के लिए पूरा वक्त दिया था. वो चाहते हैं कि एक बार फिल्म शुरू होने से पहले इसकी स्क्रिप्ट अच्छी तरह से तैयार हो जाए. अगर सब कुछ प्लान के मुताबकि हुआ जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू होगी. वैसे इससे पहले अभिषेक और तापसी की जोड़ी मनमर्जियां में साथ काम कर चुकी है. फिल्म में दोनों की केमिस्ट्री को पसंद किया गया था.
वर्क फ्रंट की बात करें तो भंसाली 'इंशाअल्लाह' का निर्देशन करने वाले हैं. 20 साल बाद भंसाली इस प्रोजेक्ट में सलमाल के साथ का कर रहे हैं. सलमान के अपोजिट आलिया भट्ट नजर आएंगी.
पाकिस्तान में दो हिंदू लड़कियों के कथित अपहरण और फिर जबरन धर्म परिवर्तन का मामला इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पहुंच गया है.
इस मामले में मंगलवार को तब नया मोड़ आ गया जब दोनों लड़कियों ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश से कहा कि उनकी उम्र 18 और 20 साल हो रही है और उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म को अपनाया है.
हाईकोर्ट ने दोनों लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है और इस्लामाबाद में रहने के लिए कहा है.
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अतहर मिनअल्लाह ने कहा कि कुछ ताक़तें पाकिस्तान की छवि को ख़राब करना चाहती हैं.
कोर्ट ने कहा, ''पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकार दूसरे देशों की तुलना में ज़्यादा है.''
हालांकि लड़की के पिता का कहना है कि उनकी दोनों बेटियां नाबालिग़ हैं जिनकी उम्र 13 और 15 साल हो रही है.
इस घटना को लेकर पाकिस्तान में काफ़ी बहस हो रही है. कई पाकिस्तानी ही पूछ रहे हैं कि केवल कम उम्र की लड़कियां ही इस्लाम से क्यों प्रभावित होती हैं और इन्हें अगवा क्यों किया जाता है. इसके साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि लड़कियों को मुसलमान बनाकर पत्नी ही क्यों बनाया जाता है? उन्हें बहन और बेटी क्यों नहीं बनाया जाता?
पाकिस्तान में हिंदू संगठन के लोग इस घटना के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. दरअसल, ये घटना होली के एक दिन पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत की ह
रिपोर्ट्स के मुताबिक़ भंसाली साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम की जिंदगी पर बन रही फिल्म प्रोड्यूस करने वाले हैं. फिल्म में अभिषेक बच्चन और तापसी पन्नू नजर आएंगे. बता दें कि साहिर लुधियानवी और अमृता प्रीतम दोनों बड़े साहित्यकार हैं. उनकी प्रेम कहानी हमेशा चर्चा में रही है. भंसाली उनके अमर प्रेम को दर्शकों के बीच परोसना चाहते हैं.
मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म में अभिषेक बच्चन, साहिर लुधियानवी के रोल में नजर आएंगे. जबकि
बताते चलें कि भंसाली काफी समय से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. उन्होंने लेखक- निर्देशक जसमीत रीन को भी स्क्रिप्ट के लिए पूरा वक्त दिया था. वो चाहते हैं कि एक बार फिल्म शुरू होने से पहले इसकी स्क्रिप्ट अच्छी तरह से तैयार हो जाए. अगर सब कुछ प्लान के मुताबकि हुआ जल्द ही फिल्म की शूटिंग शुरू होगी. वैसे इससे पहले अभिषेक और तापसी की जोड़ी मनमर्जियां में साथ काम कर चुकी है. फिल्म में दोनों की केमिस्ट्री को पसंद किया गया था.
वर्क फ्रंट की बात करें तो भंसाली 'इंशाअल्लाह' का निर्देशन करने वाले हैं. 20 साल बाद भंसाली इस प्रोजेक्ट में सलमाल के साथ का कर रहे हैं. सलमान के अपोजिट आलिया भट्ट नजर आएंगी.
पाकिस्तान में दो हिंदू लड़कियों के कथित अपहरण और फिर जबरन धर्म परिवर्तन का मामला इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पहुंच गया है.
इस मामले में मंगलवार को तब नया मोड़ आ गया जब दोनों लड़कियों ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश से कहा कि उनकी उम्र 18 और 20 साल हो रही है और उन्होंने अपनी मर्ज़ी से इस्लाम धर्म को अपनाया है.
हाईकोर्ट ने दोनों लड़कियों को सुरक्षा प्रदान करने का आदेश दिया है और इस्लामाबाद में रहने के लिए कहा है.
पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अतहर मिनअल्लाह ने कहा कि कुछ ताक़तें पाकिस्तान की छवि को ख़राब करना चाहती हैं.
कोर्ट ने कहा, ''पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकार दूसरे देशों की तुलना में ज़्यादा है.''
हालांकि लड़की के पिता का कहना है कि उनकी दोनों बेटियां नाबालिग़ हैं जिनकी उम्र 13 और 15 साल हो रही है.
इस घटना को लेकर पाकिस्तान में काफ़ी बहस हो रही है. कई पाकिस्तानी ही पूछ रहे हैं कि केवल कम उम्र की लड़कियां ही इस्लाम से क्यों प्रभावित होती हैं और इन्हें अगवा क्यों किया जाता है. इसके साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि लड़कियों को मुसलमान बनाकर पत्नी ही क्यों बनाया जाता है? उन्हें बहन और बेटी क्यों नहीं बनाया जाता?
पाकिस्तान में हिंदू संगठन के लोग इस घटना के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन कर रहे हैं और दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. दरअसल, ये घटना होली के एक दिन पहले पाकिस्तान के सिंध प्रांत की ह
Wednesday, March 20, 2019
मेरा हिंदुत्व असली, बीजेपी का राजनीतिक- केसीआरः पाँच बड़ी ख़बरें
टीआरएस अध्यक्ष और तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने चुनाव से पहले हिंदुत्व के मुद्दे को उछालने और दूसरे धर्मों के ख़िलाफ़ प्रचार करके वोट हासिल करने की कोशिश पर बीजेपी को आड़े हाथों लिया.
उन्होंने पूछा, "बीजेपी राम जन्मभूमि पर मेरा पक्ष जानने से पहले ये बताए कि बीजेपी राजनीतिक पार्टी है या एक धर्म प्रचार करने वाली पार्टी."
इसी दौरान केसीआर ने कहा, "हिंदू धर्म धार्मिक सहिष्णुता की सीख देता है. यह कभी भी किसी दूसरे धर्म के लोगों के लिए ग़लत बोलने के लिए नहीं कहता है. बीजेपी राजनीतिक हिंदुत्व करती है. मेरा हिंदुत्व असली हिंदुत्व है, आध्यात्मिक हिंदुत्व."
हालांकि इस दौरान उन्होंने बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस पर भी हमला किया. उन्होंने कहा, "देश के वास्तविक मुद्दों को हल करने में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पूरी तरह विफल रहे हैं. दोनों पार्टियां केवल राजनीतिक ड्रामे का सहारा ले रही हैं."
शक्ति परीक्षण के लिए राज्यपाल ने सुबह 11 बजे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है.
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ही मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार ने बुधवार को सदन में शक्ति परीक्षण करवाने के लिए कहा है ताकि वह अपना बहुमत साबित कर सके.
मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के अनुसार, उन्हें 21 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. जबकि इस समय 40 सदस्यों वाली विधानसभा में विधायकों की संख्या 36 है.
विधायकों की लंबी बैठक के बाद सोमवार-मंगलवार की रात को क़रीब 1.50 बजे डॉ. प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री, सुदिन धवलीकर और विजय सरदेसाई उपमुख्यमंत्री बनाए गए. इसके अलावा नौ अन्य विधायकों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई.
अरुणाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को उस वक्त जोर का झटका लगा, जब दो मंत्रियों और 12 विधायकों सहित कुल 15 नेताओं ने मंगलवार को पार्टी छोड़कर नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल होने का ऐलान कर दिया.
राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राज्य महासचिव जारपुम गामलिन, गृहमंत्री कुमार वाई, पर्यटन मंत्री जारकर गामलिन और कई विधायकों को टिकट नहीं देने के बाद बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ने का यह कदम सामने आया है.
राज्य की 60 विधानसभा सीटों में से 54 के लिए प्रत्याशियों के नामों पर बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने रविवार को मुहर लगाई. राज्य में 11 अप्रैल को लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं.
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच रही हैं. सात घंटे के इस दौरे के दौरान वो आम कार्यकर्ताओं से मिलेंगी, बाबा विश्वनाथ की पूजा करेंगी और पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों के परिजनों से मिलने जाएंगी.
इसके अलावा प्रियंका गांधी रामनगर में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के घर पर भी जाएंगी.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि मौजूदा वक़्त में ब्राज़ील और अमरीका जितने क़रीब हैं, उतने वो कभी नहीं थे. ये बातें उन्होंने ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारा का वाइट हाउस में स्वागत करते हुए कहीं.
ट्रंप ने कहा कि वो ब्राज़ील को नेटो या किसी और सहयोगी दल में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं. ट्रंप ने ये भी कहा कि वो ब्राज़ील की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विकास सहयोग संगठन का सदस्य बनने की मांग का समर्थन करते हैं.
एक बीबीसी संवाददाता ने बताया कि चूंकि दोनों नेता कट्टर राष्ट्रवादी इसलिए ज़ाहिर है, उनकी मुलाकात बेहद अच्छी रही.
दोनों ने एक दूसरे की तारीफ़ों की पुल बांधे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इससे पहले किसी अमरीकी राष्ट्रपति ने किसी धुर दक्षिणपंथी नेता का इतनी गर्मजोशी से स्वागत नहीं किया. ट्रंप और बोलसोनारो ने एक दूसरे को अपने-अपने देशों की फ़ुटबॉल टीशर्ट भी तोहफ़े में दीं.
उन्होंने पूछा, "बीजेपी राम जन्मभूमि पर मेरा पक्ष जानने से पहले ये बताए कि बीजेपी राजनीतिक पार्टी है या एक धर्म प्रचार करने वाली पार्टी."
इसी दौरान केसीआर ने कहा, "हिंदू धर्म धार्मिक सहिष्णुता की सीख देता है. यह कभी भी किसी दूसरे धर्म के लोगों के लिए ग़लत बोलने के लिए नहीं कहता है. बीजेपी राजनीतिक हिंदुत्व करती है. मेरा हिंदुत्व असली हिंदुत्व है, आध्यात्मिक हिंदुत्व."
हालांकि इस दौरान उन्होंने बीजेपी के साथ साथ कांग्रेस पर भी हमला किया. उन्होंने कहा, "देश के वास्तविक मुद्दों को हल करने में कांग्रेस और बीजेपी दोनों पूरी तरह विफल रहे हैं. दोनों पार्टियां केवल राजनीतिक ड्रामे का सहारा ले रही हैं."
शक्ति परीक्षण के लिए राज्यपाल ने सुबह 11 बजे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है.
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने ही मंगलवार को कहा कि उनकी सरकार ने बुधवार को सदन में शक्ति परीक्षण करवाने के लिए कहा है ताकि वह अपना बहुमत साबित कर सके.
मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत के अनुसार, उन्हें 21 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. जबकि इस समय 40 सदस्यों वाली विधानसभा में विधायकों की संख्या 36 है.
विधायकों की लंबी बैठक के बाद सोमवार-मंगलवार की रात को क़रीब 1.50 बजे डॉ. प्रमोद सावंत मुख्यमंत्री, सुदिन धवलीकर और विजय सरदेसाई उपमुख्यमंत्री बनाए गए. इसके अलावा नौ अन्य विधायकों को भी मंत्री पद की शपथ दिलाई गई.
अरुणाचल प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को उस वक्त जोर का झटका लगा, जब दो मंत्रियों और 12 विधायकों सहित कुल 15 नेताओं ने मंगलवार को पार्टी छोड़कर नेशनल पीपुल्स पार्टी में शामिल होने का ऐलान कर दिया.
राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के राज्य महासचिव जारपुम गामलिन, गृहमंत्री कुमार वाई, पर्यटन मंत्री जारकर गामलिन और कई विधायकों को टिकट नहीं देने के बाद बड़े पैमाने पर पार्टी छोड़ने का यह कदम सामने आया है.
राज्य की 60 विधानसभा सीटों में से 54 के लिए प्रत्याशियों के नामों पर बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने रविवार को मुहर लगाई. राज्य में 11 अप्रैल को लोकसभा के साथ विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं.
कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी बुधवार को पहली बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी पहुंच रही हैं. सात घंटे के इस दौरे के दौरान वो आम कार्यकर्ताओं से मिलेंगी, बाबा विश्वनाथ की पूजा करेंगी और पुलवामा हमले में शहीद सैनिकों के परिजनों से मिलने जाएंगी.
इसके अलावा प्रियंका गांधी रामनगर में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के घर पर भी जाएंगी.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने कहा है कि मौजूदा वक़्त में ब्राज़ील और अमरीका जितने क़रीब हैं, उतने वो कभी नहीं थे. ये बातें उन्होंने ब्राज़ील के राष्ट्रपति जेयर बोलसोनारा का वाइट हाउस में स्वागत करते हुए कहीं.
ट्रंप ने कहा कि वो ब्राज़ील को नेटो या किसी और सहयोगी दल में शामिल करने पर विचार कर रहे हैं. ट्रंप ने ये भी कहा कि वो ब्राज़ील की अंतरराष्ट्रीय आर्थिक विकास सहयोग संगठन का सदस्य बनने की मांग का समर्थन करते हैं.
एक बीबीसी संवाददाता ने बताया कि चूंकि दोनों नेता कट्टर राष्ट्रवादी इसलिए ज़ाहिर है, उनकी मुलाकात बेहद अच्छी रही.
दोनों ने एक दूसरे की तारीफ़ों की पुल बांधे. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि इससे पहले किसी अमरीकी राष्ट्रपति ने किसी धुर दक्षिणपंथी नेता का इतनी गर्मजोशी से स्वागत नहीं किया. ट्रंप और बोलसोनारो ने एक दूसरे को अपने-अपने देशों की फ़ुटबॉल टीशर्ट भी तोहफ़े में दीं.
Friday, March 8, 2019
राहुल से बोली छात्रा- बैडमिंटन कोर्ट चाहिए, जवाब मिला, पैसा तो PM ने अंबानी को दे दिया
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ओडिशा के कोरापुट में महिलाओं से मुलाकात की. राहुल इस दौरान कॉलेज की छात्राओं, घरेलू महिलाओं और नेताओं से मिले. राहुल गांधी ओडिशा के उस लोकसभा क्षेत्र में थे जहां से आजादी के बाद कांग्रेस अबतक 13 बार लोकसभा का चुनाव जीत चुकी है. कोरापुट के जयपोर में छात्राओं से बात करते हुए राहुल गांधी ने एक बार फिर से राफेल विमान के सौदे में करप्शन का मुद्दा उठाया. महिलाओं से बातचीत के दौरान एक छात्रा ने कहा कि वह बैडमिंटन खेलना चाहती है, लेकिन बैडमिंटन कोर्ट की हालत खराब है.
इस छात्रा को जवाब देते हुए राहुल गांधी ने राफेल में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आपके बैंडमिंटन कोर्ट का पैसा छीनकर अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने छात्रा को समझाते हुए कहा, "कोरापुट में राफेल हवाई जहाज का इंजन बनना था, मगर प्रधानमंत्री ने HAL से कॉन्ट्रैक्ट छीना और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने कहा कि इस डील की वजह से अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ का फायदा हुआ.
कोरापुट लोकसभा सीट: जहां आजादी के बाद 13 बार जीत चुकी है कांग्रेस
राहुल ने कहा कि इतना पैसा हिन्दुस्तान में मनरेगा को एक साल चलाने में लगता है. अनिल अंबानी ने जिंदगी में एक बार भी हवाई जहाज नहीं बनाया. राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री ने आपसे ओडिशा में रोजगार छीना, प्रधानमंत्री ने आपका जो बैडमिंटन कोर्ट है उसका पैसा छीन अनिल अंबानी को दे दिया, यही बात ओडिशा में हो रहा है." राहुल ने कहा कि पिछले 4.5 सालों में पीएम ने अमीरों का 3.5 लाख करोड़ रुपया कर्ज माफ किया है. लेकिन वे किसानों का कर्ज माफ नहीं कर रहे हैं.
राहुल ने कहा कि मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या हजारों करोड़ लेकर भाग गए लेकिन सरकार उनका कुछ नहीं कर रही है. उन्होंने लड़कियों से कहा कि अगर आपके पापा लोन लेकर पैसा नहीं चुकाते हैं तो उन्हें पुलिस पकड़कर ले जाएगी. राहुल ने महिलाओं और लड़कियों से आग्रह किया कि वे सक्रिय राजनीति में आएं और इस राजनीति को बदलें.
राहुल ने महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान कहा कि अगर अगली बार केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो वह महिला आरक्षण महिला बिल पास कराने की कोशिश करेंगे. राहुल ने रोजगार की भी बात की. उन्होंने कहा कि चीन में 24 घंटे में 50 हजार लोगों को रोजगार मिलता है, लेकिन हिन्दुस्तान में उसी 24 घंटे में यहां पर मात्र 450 लोगों को रोजगार मिलता है.
इसके तहत नो कॉस्ट ईएमआई के साथ कैशबैक भी दिए जाएंगे. फ्लिपकार्ट की इस सेल में ऐपल, सैमसंग और शाओमी सहित लगभग सभी स्मार्टफोन्स कंपनियों के कुछ स्मार्टफोन डिस्काउंट में मिल रहे हैं.
iPhone XR, Redmi Note 6 Pro, ZenFone 5Z जैसे स्मार्टफोन भी स्सते में मिल रहे हैं. इसके अलावा ऑनर ने भी अपने तीन स्मार्टफोन्स पर Womens डे सेल में छूट देने का ऐलान किया है. इन स्मार्टफोन्स पर 6,000 रुपये तक की छूट मिल रही है. ऑनर की ये सेल सिर्फ एक दिन के लिए ही है और इसकी शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान बजट सेग्मेंट पर फोकस किया गया है और इन पर छूट मिल रही है.
Xiaomi के पॉपुलर स्मर्टफोन्स पर भी डिस्काउंट दिया जा रहा है. इसमें Redmi Note 6 Pro है जिस पर 3,000 रुपये का डिस्काउंट है. ये भी लिमिटेड पीरियड ऑफर है. हाल ही में कंपनी Redmi Note 7 Pro लॉन्च किया है और मुमकिन है Note 6 Pro को स्टॉक क्लियर होने के बाद बंद कर दिया जाए.
इस छात्रा को जवाब देते हुए राहुल गांधी ने राफेल में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया. राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आपके बैंडमिंटन कोर्ट का पैसा छीनकर अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने छात्रा को समझाते हुए कहा, "कोरापुट में राफेल हवाई जहाज का इंजन बनना था, मगर प्रधानमंत्री ने HAL से कॉन्ट्रैक्ट छीना और अपने मित्र अनिल अंबानी को दे दिया. राहुल ने कहा कि इस डील की वजह से अनिल अंबानी को 30 हजार करोड़ का फायदा हुआ.
कोरापुट लोकसभा सीट: जहां आजादी के बाद 13 बार जीत चुकी है कांग्रेस
राहुल ने कहा कि इतना पैसा हिन्दुस्तान में मनरेगा को एक साल चलाने में लगता है. अनिल अंबानी ने जिंदगी में एक बार भी हवाई जहाज नहीं बनाया. राहुल ने कहा, "प्रधानमंत्री ने आपसे ओडिशा में रोजगार छीना, प्रधानमंत्री ने आपका जो बैडमिंटन कोर्ट है उसका पैसा छीन अनिल अंबानी को दे दिया, यही बात ओडिशा में हो रहा है." राहुल ने कहा कि पिछले 4.5 सालों में पीएम ने अमीरों का 3.5 लाख करोड़ रुपया कर्ज माफ किया है. लेकिन वे किसानों का कर्ज माफ नहीं कर रहे हैं.
राहुल ने कहा कि मेहुल चोकसी, नीरव मोदी और विजय माल्या हजारों करोड़ लेकर भाग गए लेकिन सरकार उनका कुछ नहीं कर रही है. उन्होंने लड़कियों से कहा कि अगर आपके पापा लोन लेकर पैसा नहीं चुकाते हैं तो उन्हें पुलिस पकड़कर ले जाएगी. राहुल ने महिलाओं और लड़कियों से आग्रह किया कि वे सक्रिय राजनीति में आएं और इस राजनीति को बदलें.
राहुल ने महिलाओं के साथ बातचीत के दौरान कहा कि अगर अगली बार केन्द्र में कांग्रेस की सरकार बनती है तो वह महिला आरक्षण महिला बिल पास कराने की कोशिश करेंगे. राहुल ने रोजगार की भी बात की. उन्होंने कहा कि चीन में 24 घंटे में 50 हजार लोगों को रोजगार मिलता है, लेकिन हिन्दुस्तान में उसी 24 घंटे में यहां पर मात्र 450 लोगों को रोजगार मिलता है.
इसके तहत नो कॉस्ट ईएमआई के साथ कैशबैक भी दिए जाएंगे. फ्लिपकार्ट की इस सेल में ऐपल, सैमसंग और शाओमी सहित लगभग सभी स्मार्टफोन्स कंपनियों के कुछ स्मार्टफोन डिस्काउंट में मिल रहे हैं.
iPhone XR, Redmi Note 6 Pro, ZenFone 5Z जैसे स्मार्टफोन भी स्सते में मिल रहे हैं. इसके अलावा ऑनर ने भी अपने तीन स्मार्टफोन्स पर Womens डे सेल में छूट देने का ऐलान किया है. इन स्मार्टफोन्स पर 6,000 रुपये तक की छूट मिल रही है. ऑनर की ये सेल सिर्फ एक दिन के लिए ही है और इसकी शुरुआत हो चुकी है. इस दौरान बजट सेग्मेंट पर फोकस किया गया है और इन पर छूट मिल रही है.
Xiaomi के पॉपुलर स्मर्टफोन्स पर भी डिस्काउंट दिया जा रहा है. इसमें Redmi Note 6 Pro है जिस पर 3,000 रुपये का डिस्काउंट है. ये भी लिमिटेड पीरियड ऑफर है. हाल ही में कंपनी Redmi Note 7 Pro लॉन्च किया है और मुमकिन है Note 6 Pro को स्टॉक क्लियर होने के बाद बंद कर दिया जाए.
Wednesday, February 27, 2019
वर्ल्ड कप में PAK मैच के बायकॉट से स्टार इंडिया को हो सकता है बड़ा घाटा
भारत सरकार और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ मैच के बहिष्कार पर सहमत हो गए, तो आईसीसी वर्ल्ड कप के मीडिया अधिकार धारक स्टार इंडिया को बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है. हालांकि स्टार इंडिया अन्य बीमा पॉलिसियां खरीदकर संभावित नुकसान से खुद को बचा सकता है.
क्रिकेट के दीवाने देश के प्रशंसक पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने और उसके बाद की गतिविधियों के मद्देनजर पाकिस्तान से मैच का बहिष्कार करना चाहते हैं. भारत 16 जून को वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपना लीग मैच नहीं खेलता है, तो स्टार इंडिया को विज्ञापन राजस्व मामले में कम से कम 100-120 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.
ब्रॉडकास्टर ने न्यू इंडिया एश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से विश्व कप के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये का बीमा कराया है. इकोनॉमिक्स टाइम्स ने करीबी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि न्यू इंडिया एश्योरेंस स्टार इंडिया के लिए प्रमुख बीमाकर्ता है. एक मैच रद्द होने के कारण विज्ञापन हानि को कवर करने वाली यह 1,457 करोड़ रुपये की पॉलिसी है.
इस पॉलिसी में विश्व कप में खेले जाने वाले सभी मैच शामिल हैं. हालांकि, प्रसारक को आतंकवाद के जोखिम के लिए एक अलग पॉलिसी खरीदनी होगी. न्यू इंडिया एश्योरेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की. यूनाइटेड इंडिया एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ सह-बीमाकर्ता है.
मौसम का हाल तथा आपदाओं के कारण भाग नहीं लेने वाली टीमों की वजह से मैच रद्द होने की स्थिति में यह पॉलिसी कवर करेगी. लेकिन 'मैच बहिष्कार का जोखिम' इस पॉलिसी में शामिल नहीं है. इस साल वर्ल्ड कप मैच में तीन महीने बाकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार इंडिया बहिष्कार के जोखिम को कवर करने के लिए आतंकवाद से जुड़ी 'बायकॉट कवर पॉलिसी' खरीद सकता है.
पिछले वर्ल्ड कप में 15 फरवरी 2015 को खेले गए भारत-पाकिस्तान मैच से अनुमानित विज्ञापन राजस्व 93 ब्रांडों से 100-110 करोड़ रुपये था, और उस मैच को ऐतिहासिक 28.8 करोड़ दर्शकों ने देखा. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने पहली बार 1993 में भारतीय टीम के लिए पॉलिसी ली थी. विश्व कप की बात करें, तो उसने 1996 के वर्ल्ड कप से बीमा पॉलिसी लेनी शुरू की.
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दावा किया है कि उनके लड़ाकू विमान ने भारत के कई इलाकों में बमबारी की है. उन्होंने कहा कि हमारा मकसद भारत को बताना था कि हमारी सेना में दम है. पाकिस्तानी सेना दावा कर रही है कि उन्होंने भारत के दो पायलटों को अपनी हिरासत में लिया है.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि हमने अपनी स्ट्राइक में कोशिश की थी किसी को नुकसान ना पहुंचे. हमने 6 टारगेट तय किए थे, जिसके बाद हमने स्ट्राइक किया. बिम्बरगरी समेत कई इलाकों में हमने टारगेट किया. हम बस ये बताना चाहते थे कि हम सबकुछ कर सकते हैं, लेकिन इलाके में शांति के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हम शांति चाहते हैं युद्ध नहीं करना चाहते हैं. पाकिस्तान के एक्शन के बाद भारत के दो जहाज LoC पर कर पाकिस्तान की सीमा में आए, हमने दोनों को निशाना बनाया. एक भारत की जमीन पर और दूसरा पाकिस्तान की जमीन पर गिरा, दो पायलट को गिरफ्तार किया गया है एक घायल है और दूसरा गिरफ्त में है. उनके पास से कई कागजात मिले हैं.
क्रिकेट के दीवाने देश के प्रशंसक पुलवामा हमले में 40 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने और उसके बाद की गतिविधियों के मद्देनजर पाकिस्तान से मैच का बहिष्कार करना चाहते हैं. भारत 16 जून को वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ अपना लीग मैच नहीं खेलता है, तो स्टार इंडिया को विज्ञापन राजस्व मामले में कम से कम 100-120 करोड़ रुपये का नुकसान होगा.
ब्रॉडकास्टर ने न्यू इंडिया एश्योरेंस, यूनाइटेड इंडिया और एसबीआई जनरल इंश्योरेंस से विश्व कप के लिए करीब 1,500 करोड़ रुपये का बीमा कराया है. इकोनॉमिक्स टाइम्स ने करीबी सूत्रों के हवाले से लिखा है कि न्यू इंडिया एश्योरेंस स्टार इंडिया के लिए प्रमुख बीमाकर्ता है. एक मैच रद्द होने के कारण विज्ञापन हानि को कवर करने वाली यह 1,457 करोड़ रुपये की पॉलिसी है.
इस पॉलिसी में विश्व कप में खेले जाने वाले सभी मैच शामिल हैं. हालांकि, प्रसारक को आतंकवाद के जोखिम के लिए एक अलग पॉलिसी खरीदनी होगी. न्यू इंडिया एश्योरेंस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसकी पुष्टि की. यूनाइटेड इंडिया एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के साथ सह-बीमाकर्ता है.
मौसम का हाल तथा आपदाओं के कारण भाग नहीं लेने वाली टीमों की वजह से मैच रद्द होने की स्थिति में यह पॉलिसी कवर करेगी. लेकिन 'मैच बहिष्कार का जोखिम' इस पॉलिसी में शामिल नहीं है. इस साल वर्ल्ड कप मैच में तीन महीने बाकी हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि स्टार इंडिया बहिष्कार के जोखिम को कवर करने के लिए आतंकवाद से जुड़ी 'बायकॉट कवर पॉलिसी' खरीद सकता है.
पिछले वर्ल्ड कप में 15 फरवरी 2015 को खेले गए भारत-पाकिस्तान मैच से अनुमानित विज्ञापन राजस्व 93 ब्रांडों से 100-110 करोड़ रुपये था, और उस मैच को ऐतिहासिक 28.8 करोड़ दर्शकों ने देखा. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने पहली बार 1993 में भारतीय टीम के लिए पॉलिसी ली थी. विश्व कप की बात करें, तो उसने 1996 के वर्ल्ड कप से बीमा पॉलिसी लेनी शुरू की.
भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की सेना ने एक बार फिर बड़ा दावा किया है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दावा किया है कि उनके लड़ाकू विमान ने भारत के कई इलाकों में बमबारी की है. उन्होंने कहा कि हमारा मकसद भारत को बताना था कि हमारी सेना में दम है. पाकिस्तानी सेना दावा कर रही है कि उन्होंने भारत के दो पायलटों को अपनी हिरासत में लिया है.
पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर ने कहा कि हमने अपनी स्ट्राइक में कोशिश की थी किसी को नुकसान ना पहुंचे. हमने 6 टारगेट तय किए थे, जिसके बाद हमने स्ट्राइक किया. बिम्बरगरी समेत कई इलाकों में हमने टारगेट किया. हम बस ये बताना चाहते थे कि हम सबकुछ कर सकते हैं, लेकिन इलाके में शांति के लिए कुछ नहीं कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि हम शांति चाहते हैं युद्ध नहीं करना चाहते हैं. पाकिस्तान के एक्शन के बाद भारत के दो जहाज LoC पर कर पाकिस्तान की सीमा में आए, हमने दोनों को निशाना बनाया. एक भारत की जमीन पर और दूसरा पाकिस्तान की जमीन पर गिरा, दो पायलट को गिरफ्तार किया गया है एक घायल है और दूसरा गिरफ्त में है. उनके पास से कई कागजात मिले हैं.
Wednesday, February 20, 2019
जापान के ये पेड़ भविष्य बता सकते हैं
मानव इतिहास की शुरुआत जंगलों से हुई थी. इन्हीं जंगलों में इंसान के बहुत से राज़ भी पोशीदा हैं. ये पेड़ और जंगल इंसान को इस हद तक समझते हैं कि उसका भविष्य तक बता सकते हैं.
और इसकी मिसाल हैं जापान के जंगलों में पाए जाने वाले हिनोकी पेड़ जिनमें जापान में बारिश होने का 2600 साल पुराना रिकॉर्ड मौजूद है. अब इन पेड़ों की मदद से पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आने वाले समय में जापान में किस तरह का जलवायु परिवर्तन होगा.
उसकी बुनियाद पर हालात से निपटने की रणनीति बनेगी.
ताकेशी नकात्सुका, जापान रिसर्च इंस्टीट्यूट के रिसर्चर और प्रागैतिहास काल के मौसम के जानकार हैं. वो 68 लोगों की टीम के साथ इस बारे में पिछले एक दशक से रिसर्च कर रहे हैं.
उन्होंने 2800 से 3000 साल पुराने पेड़ों के टुकड़े इकट्ठा किए हैं. जिनके छल्लों में छुपे राज़ समझने की कोशिश हो रही है. ताकि ये पता लगाया जा सके कि बीते ज़माने में जापान में कितनी बारिश होती थी.
रिसर्च में पाया गया है कि हर 400 साल में कुछ समय के लिए जापान में बारिश होने का तरीक़ा बदलता है. जिसकी वजह से कई-कई दशक तक देश ने सैलाब या सूखे की मार झेली.
और इसी के मुताबिक़ जापानी समाज फला-फूला या बुरे हालात का सामना करता रहा. नकात्सुका कहते हैं कि गुज़रे ज़माने में हुई बारिश और जलवायु परिवर्तन के आधार पर भविष्य की आब-ओ-हवा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
आज का मौसम या जीवनकाल पिछले हज़ार या दो हज़ार साल में बहुत ज़्यादा नहीं बदला है.
इस तरह की रिसर्च के लिए जापान का मध्य इलाक़ा सबसे बेहतरीन जगह है, क्योंकि यहां भारी संख्या में हिनोकी पेड़ मौजूद हैं. नकात्सुका ने यहां से 68 हिनोकी पेड़ों के सैम्पल रिसर्च के लिए जमा किए.
ये पेड़ सौ साल से लेकर एक हज़ार साल तक पुराने बताए जाते हैं. अच्छी बात ये है कि नकात्सुका ने रिसर्च के लिए एक नया तरीक़ा ढूंढ निकाला है जिसे आईसोटोप रेशियो कहते हैं. जमा किए गए सैम्पल में ऑक्सीजन आईसोटोप रेशो की जांच की जा रही है.
इसकी बुनियाद पर एक ख़ास दौर के मौसम और माहौल को समझने में मदद मिलती है. नकात्सुका कहते हैं कि इस तरीक़े से उन्हें गर्मी के मौसम में बारिश का अनुमान लगाने में काफ़ी मदद मिली है.
रिसर्च से पता चलता है कि बीते 400 सालों में बारिश बहुत अनियमित रही है. ये बदलाव हर कुछ दशक में देखने को मिलता रहा है.
नकात्सुका अपनी रिसर्च में इतिहासकारों और पुरातत्वविदों की मदद भी ले रहे हैं. इतिहासकारों के मुताबिक़ मध्यकालीन जापान में बारिश के लिए बड़े पंडितों या पुरोहितों से पूजा कराई जाती थी.
यानी उस दौर में बारिश कम थी. नकात्सुका की रिसर्च भी इसी ओर इशारा करती है. इसी तरह खेती शुरू होने के बाद जिस तरह से पानी संजोने के तरीक़े ढूंढे गए उससे पता चलता है कि उस दौर में बारिश इतनी कम रही होगी कि सूखे के हालात पैदा हो गए होंगे.
सबसे ख़ास बात ये है कि सूखे का ये दौर चीन और जापान में लंबे समय तक दर्ज हुआ है. और उसी के हिसाब ने उस दौर के समाज ने ख़ुद को ढाला.
प्रागैतिहासिक काल के पुरातत्वविद और इतिहासकार कुनिहिको वाकाबयाशी का कहना है कि नई रिसर्च सामने आने से पहले तक वो समाज में हो रहे बदलावों को राज्य निर्माण का तरीक़ा मान रहे थे.
लेकिन अब नकात्सुका की रिसर्च से इस बात पर मुहर लगती है कि इन बदलावों की जड़ में सैलाब या सूखा था.
मिसाल के लिए 1000 ई.पू से लेकर 350 ई. तक यायोई के काल में ज़्यादातर आबादी योडा नदी के पास बसी थी. भरपूर पानी होने की वजह से यहां लोगों ने चावल की खेती शुरू कर दी.
चावल यहां के लोगों का बुनियादी खाना बन गया. लेकिन जैसे-जैसे सैलाब आते थे लोगों दूर जगहों पर जाना शुरू कर देते थे.
हालांकि 100 ई.पू में हालात बदलने लगते थे. तापमान में कमी दर्ज की जाने लगी थी और बारिश में इज़ाफ़ा होने लगा था. लिहाज़ा लोगों ने फिर ऊंचाई वाले इलाक़ों में रहना शुरू कर दिया.
पांचवीं सदी में तो बहुत तेज़ी से नई जगहों पर बसावट देखने को मिलती है. इसमें पहाड़ी इलाक़े मुख्य रूप से शामिल हैं. जहां जाकर बड़ी संख्या में लोग बस गए. तीसरी से छठीं सदी तक घाटी में बमुश्किल ही कोई घर बचा था. समाज में तेज़ी से बदलाव आ रहे थे.
मिसाल के लिए धान की फ़सल के रख-रखाव की ज़िम्मेदार स्थानीय मुखिया को दी जाने लगी. जो लोग पहाड़ों में रहने लगे थे वो खेतिहर मज़दूर बन गए. अपनी मेहनत का उन्हें पूरा हिस्सा मिलना बंद हो गया. मैदानों में जिनके पास छोटे ज़मीन के टुकड़े थे वो अलग हो गए और बड़े टुकड़े वाले अलग. और यहीं से समाज में असमानता, अमीर और ग़रीब की रेखा खिंच गई.
सातवीं सदी तक जब बारिश कुछ हद तक कम हुई तो लोगों ने एक बार फिर पहाड़ों से निकल कर मैदानों की तरफ़ आना शुरू किया. यही वो दौर था जब जापान में बौद्ध धर्म अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था. और समाज में रहने के तौर तरीक़ों के लिए क़ानून बन रहे थे.
और इसकी मिसाल हैं जापान के जंगलों में पाए जाने वाले हिनोकी पेड़ जिनमें जापान में बारिश होने का 2600 साल पुराना रिकॉर्ड मौजूद है. अब इन पेड़ों की मदद से पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आने वाले समय में जापान में किस तरह का जलवायु परिवर्तन होगा.
उसकी बुनियाद पर हालात से निपटने की रणनीति बनेगी.
ताकेशी नकात्सुका, जापान रिसर्च इंस्टीट्यूट के रिसर्चर और प्रागैतिहास काल के मौसम के जानकार हैं. वो 68 लोगों की टीम के साथ इस बारे में पिछले एक दशक से रिसर्च कर रहे हैं.
उन्होंने 2800 से 3000 साल पुराने पेड़ों के टुकड़े इकट्ठा किए हैं. जिनके छल्लों में छुपे राज़ समझने की कोशिश हो रही है. ताकि ये पता लगाया जा सके कि बीते ज़माने में जापान में कितनी बारिश होती थी.
रिसर्च में पाया गया है कि हर 400 साल में कुछ समय के लिए जापान में बारिश होने का तरीक़ा बदलता है. जिसकी वजह से कई-कई दशक तक देश ने सैलाब या सूखे की मार झेली.
और इसी के मुताबिक़ जापानी समाज फला-फूला या बुरे हालात का सामना करता रहा. नकात्सुका कहते हैं कि गुज़रे ज़माने में हुई बारिश और जलवायु परिवर्तन के आधार पर भविष्य की आब-ओ-हवा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.
आज का मौसम या जीवनकाल पिछले हज़ार या दो हज़ार साल में बहुत ज़्यादा नहीं बदला है.
इस तरह की रिसर्च के लिए जापान का मध्य इलाक़ा सबसे बेहतरीन जगह है, क्योंकि यहां भारी संख्या में हिनोकी पेड़ मौजूद हैं. नकात्सुका ने यहां से 68 हिनोकी पेड़ों के सैम्पल रिसर्च के लिए जमा किए.
ये पेड़ सौ साल से लेकर एक हज़ार साल तक पुराने बताए जाते हैं. अच्छी बात ये है कि नकात्सुका ने रिसर्च के लिए एक नया तरीक़ा ढूंढ निकाला है जिसे आईसोटोप रेशियो कहते हैं. जमा किए गए सैम्पल में ऑक्सीजन आईसोटोप रेशो की जांच की जा रही है.
इसकी बुनियाद पर एक ख़ास दौर के मौसम और माहौल को समझने में मदद मिलती है. नकात्सुका कहते हैं कि इस तरीक़े से उन्हें गर्मी के मौसम में बारिश का अनुमान लगाने में काफ़ी मदद मिली है.
रिसर्च से पता चलता है कि बीते 400 सालों में बारिश बहुत अनियमित रही है. ये बदलाव हर कुछ दशक में देखने को मिलता रहा है.
नकात्सुका अपनी रिसर्च में इतिहासकारों और पुरातत्वविदों की मदद भी ले रहे हैं. इतिहासकारों के मुताबिक़ मध्यकालीन जापान में बारिश के लिए बड़े पंडितों या पुरोहितों से पूजा कराई जाती थी.
यानी उस दौर में बारिश कम थी. नकात्सुका की रिसर्च भी इसी ओर इशारा करती है. इसी तरह खेती शुरू होने के बाद जिस तरह से पानी संजोने के तरीक़े ढूंढे गए उससे पता चलता है कि उस दौर में बारिश इतनी कम रही होगी कि सूखे के हालात पैदा हो गए होंगे.
सबसे ख़ास बात ये है कि सूखे का ये दौर चीन और जापान में लंबे समय तक दर्ज हुआ है. और उसी के हिसाब ने उस दौर के समाज ने ख़ुद को ढाला.
प्रागैतिहासिक काल के पुरातत्वविद और इतिहासकार कुनिहिको वाकाबयाशी का कहना है कि नई रिसर्च सामने आने से पहले तक वो समाज में हो रहे बदलावों को राज्य निर्माण का तरीक़ा मान रहे थे.
लेकिन अब नकात्सुका की रिसर्च से इस बात पर मुहर लगती है कि इन बदलावों की जड़ में सैलाब या सूखा था.
मिसाल के लिए 1000 ई.पू से लेकर 350 ई. तक यायोई के काल में ज़्यादातर आबादी योडा नदी के पास बसी थी. भरपूर पानी होने की वजह से यहां लोगों ने चावल की खेती शुरू कर दी.
चावल यहां के लोगों का बुनियादी खाना बन गया. लेकिन जैसे-जैसे सैलाब आते थे लोगों दूर जगहों पर जाना शुरू कर देते थे.
हालांकि 100 ई.पू में हालात बदलने लगते थे. तापमान में कमी दर्ज की जाने लगी थी और बारिश में इज़ाफ़ा होने लगा था. लिहाज़ा लोगों ने फिर ऊंचाई वाले इलाक़ों में रहना शुरू कर दिया.
पांचवीं सदी में तो बहुत तेज़ी से नई जगहों पर बसावट देखने को मिलती है. इसमें पहाड़ी इलाक़े मुख्य रूप से शामिल हैं. जहां जाकर बड़ी संख्या में लोग बस गए. तीसरी से छठीं सदी तक घाटी में बमुश्किल ही कोई घर बचा था. समाज में तेज़ी से बदलाव आ रहे थे.
मिसाल के लिए धान की फ़सल के रख-रखाव की ज़िम्मेदार स्थानीय मुखिया को दी जाने लगी. जो लोग पहाड़ों में रहने लगे थे वो खेतिहर मज़दूर बन गए. अपनी मेहनत का उन्हें पूरा हिस्सा मिलना बंद हो गया. मैदानों में जिनके पास छोटे ज़मीन के टुकड़े थे वो अलग हो गए और बड़े टुकड़े वाले अलग. और यहीं से समाज में असमानता, अमीर और ग़रीब की रेखा खिंच गई.
सातवीं सदी तक जब बारिश कुछ हद तक कम हुई तो लोगों ने एक बार फिर पहाड़ों से निकल कर मैदानों की तरफ़ आना शुरू किया. यही वो दौर था जब जापान में बौद्ध धर्म अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था. और समाज में रहने के तौर तरीक़ों के लिए क़ानून बन रहे थे.
Sunday, January 27, 2019
पश्चिमी देशों के शहरों में आबाद हो रहे जंगल के पशु-पक्षी
जंगली जानवर, जंगलों से विलुप्त हो रहे हैं. बहुत सी प्रजातियां हैं, जिनके पूरी तरह से ख़ात्मे का ख़तरा मंडरा रहा है.
ऐसे में हम आप को बताएं कि शहरों का जंगलीकरण, इन जीवों को वापस शहरों में ला रहा है, तो शायद आप को बात क़ाबिल-ए-यक़ीन न लगे. पर है ये सौ फ़ीसदी सच्ची बात.
पश्चिमी देशों में बहुत से शहर जंगली पशु-पक्षियों से आबाद हो रहे हैं. इनमें शिकारी पक्षियों से लेकर, तितलियों और दूसरे कीड़े-मकोड़ों तक की नस्लें शामिल हैं.
लंदन के बेहद व्यस्त वेस्ट एंड इलाक़े में बेहद दुर्लभ होता पक्षी देखा जाने लगा है. हालांकि इनकी तादाद बहुत कम है. मगर, इन जंगली पक्षियों का लंदन के व्यस्त हिस्से में आबाद होना ही बहुत चौंकाने वाली बाती है.
इस विलुप्त होते पक्षी का नाम है ब्लैक रेडस्टार्ट. माना जाता है कि पूरे इंग्लैंड में इस प्रजाति के पक्षियों के 20 से 40 जोड़े ही होंगे. लेकिन, हाल के बरसों में इन्हें सेंट्रल लंदन में देखा गया है.
वैसे, केवल ये परिंदा ही शहर में आकर बसा हो, ऐसा भी नहीं. बहुत से कीड़े, तितलियां, कठफोड़वा पक्षी और चमगादड़ों की कुछ प्रजातियां भी शहरों में अपना आशियाना बना रही हैं. आम तौर पर ये जीव-जंतु ग्रामीण अंचलों में ही पाये जाते थे. लेकिन, अब ये लंदन के व्यस्त इलाक़ों में भी ठिकाना बनाने लगे हैं.
जंगली और विलुप्त होते जीवों का शहरों में आबाद होना सिर्फ़ लंदन में देखने को मिल रहा है, ऐसा नहीं है.
न्यूयॉर्क में आप को दुनिया का सबसे तेज़ शिकारी माना जाने वाला पेरेग्राइन बाज़ बहुमंज़िला इमारतों के बीच गोते लगाता दिख जाएगा.
एक दौर ऐसा भी था, जब पेरेग्राइन बाज़ को विलुप्त मान लिया गया था. लेकिन, अब ये न्यूयॉर्क की बहुमंज़िला इमारतों के बीच अक्सर उड़ता दिख जाता है.
जंगली जीवों का शहरों में दिखना यूं ही नहीं हो रहा है. इसके लिए इन शहरों में ख़ास प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं. इन्हें अंग्रेज़ी में 'अर्बन रिवाइल्डिंग प्रोजेक्ट' यानी शहरों का जंगलीकरण कहते हैं. अब ऊंची इमारतों की छतों पर हरित पट्टियां विकसित की जा रही हैं. ताकि शहरियों के बीच ये जंगली जीव भी आबाद हो सकें. एक ऐसे ही प्रोजेक्ट के तहत दफ़्तर में मधुमक्खियों का छत्ता लगाने का काम हो रहा है.
लंदन की आर्किटेक्ट एमिली वुडैसन ऐसे ही प्रोजेक्ट डिज़ाइन करती हैं. एमिली कहती हैं कि आप को शहर की बनावट और बसावट को पूरी तरह बदलनी ज़रूरत नहीं है. बस इमारतों के जंगल के बीच हरियाली विकसित करने की ज़रूरत है. ऐसा घरों की छतों, बहुमंज़िला इमारतों के टैरेस और दीवारों पर भी हो सकता है.
लंदन में ज़मीन के छह बड़े मालिकों के साथ मिलकर द वाइल्ड वेस्ट एंड प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है. इसके तहत हर सौ मीटर की दूरी पर हरियाली वाली पट्टी विकसित की जा रही है, जिसका दायरा क़रीब 100 वर्ग मीटर होगा.
एमिली कहती हैं कि ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. इसके तहत लंदन के पार्कों को जोड़ने वाली हरित पट्टी विकसित करने की योजना है.
हरियाली भरी पट्टियां विकसित करने के साथ बहुत से ज़मीन मालिक मौजूदा इमारतों में ही हरी-भरी दीवार और छतें विकसित कर रहे हैं. मतलब ये कि दीवारों पर ही हरियाली उगाई जा रही है और छतों में छोटे बागीचे लगाए जा रहे हैं. अब तक जो प्रगति है, उससे लगता है कि ये नुस्खे काम आ रहे हैं. इन कोशिशों का ही नतीजा है कि लंदन से ग़ायब हो चुके कई जीव वापस दिखने लगे हैं. ब्लैक रेडस्टार्ट इसका एक नमूना है.
एमिली कहती हैं कि, 'हम दूसरे जीवों को लुभाने के लिए शहरों में चट्टानों या लकड़ी का ढेर लगा सकते हैं. इससे कई तरह के कीड़े शहरों की तरफ़ आएंगे. दूसरी प्रजातियां भी इस तरह से शहरों में आबाद होंगी. किसी पक्षी के रहने के लिए ये ठिकाने आदर्श जगह बन सकते हैं.'
जंगली और दुर्लभ जीवों को शहरों की तरफ़ आकर्षित करना सिर्फ़ अच्छा महसूस होना भर नहीं है. इससे शहरी जीव में विविधता आती है. शहर का नज़ारा दिलकश होता है. ऐसे प्रोजेक्ट से शहर की तरफ़ आकर्षित किए गए जीव हमारी खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत अहम हैं. ये वो जीव हैं, जो फलों और सब्ज़ियों के परागण में अहम रोल निभाते हैं. जैसे कि मधुमक्खियां और तितलियां.
दुनिया भर में तितलियों और मधुमक्खियों की तादाद में भारी गिरावट देखी जा रही है.
पर्यावरण के साथ आर्किटेक्ट की प्लानिंग करने वाली कंपनी टेरेफॉर्म के निदेशक मिशेल जोआचिम कहते हैं कि, 'हमें ये एहसास हो रहा है कि योजना बनाने, विकास करने, आर्किटेक्चर और औद्योगिक डिज़ाइन ने मिलकर बहुत से जीवों की नस्ल पर तबाही बरपायी है. हम शहरों का जंगलीकरण कर के, इमारतों की प्लानिंग में बदलाव कर के शहरों को जंगली जीवों के रहने लायक़ बना सकते हैं.'
कई बार इसके लिए आठ मंज़िला पारदर्शी चरागाह विकसित करने जैसा काम भी हो सकता है न्यूयॉर्क के मैनहट्टन इलाक़े में ऐसा ही चरागाह विकसित किया गया है.
इसी तरह उत्तरी अमरीका की मोनार्च तितलियां ख़ात्मे के कगार पर हैं. 1980 के दशक के बाद से ही मिल्कवीड नाम के एक जंगली पौधे को हटाने पर लोगों के ज़ोर देने की वजह से ये शाही तितलियां भी ख़त्म हो रही हैं. वजह ये है कि शाही तितलियां इस मिल्कवीड पौधे पर ही प्रजनन करती हैं और अपने बच्चे पालती हैं.
ऐसे में हम आप को बताएं कि शहरों का जंगलीकरण, इन जीवों को वापस शहरों में ला रहा है, तो शायद आप को बात क़ाबिल-ए-यक़ीन न लगे. पर है ये सौ फ़ीसदी सच्ची बात.
पश्चिमी देशों में बहुत से शहर जंगली पशु-पक्षियों से आबाद हो रहे हैं. इनमें शिकारी पक्षियों से लेकर, तितलियों और दूसरे कीड़े-मकोड़ों तक की नस्लें शामिल हैं.
लंदन के बेहद व्यस्त वेस्ट एंड इलाक़े में बेहद दुर्लभ होता पक्षी देखा जाने लगा है. हालांकि इनकी तादाद बहुत कम है. मगर, इन जंगली पक्षियों का लंदन के व्यस्त हिस्से में आबाद होना ही बहुत चौंकाने वाली बाती है.
इस विलुप्त होते पक्षी का नाम है ब्लैक रेडस्टार्ट. माना जाता है कि पूरे इंग्लैंड में इस प्रजाति के पक्षियों के 20 से 40 जोड़े ही होंगे. लेकिन, हाल के बरसों में इन्हें सेंट्रल लंदन में देखा गया है.
वैसे, केवल ये परिंदा ही शहर में आकर बसा हो, ऐसा भी नहीं. बहुत से कीड़े, तितलियां, कठफोड़वा पक्षी और चमगादड़ों की कुछ प्रजातियां भी शहरों में अपना आशियाना बना रही हैं. आम तौर पर ये जीव-जंतु ग्रामीण अंचलों में ही पाये जाते थे. लेकिन, अब ये लंदन के व्यस्त इलाक़ों में भी ठिकाना बनाने लगे हैं.
जंगली और विलुप्त होते जीवों का शहरों में आबाद होना सिर्फ़ लंदन में देखने को मिल रहा है, ऐसा नहीं है.
न्यूयॉर्क में आप को दुनिया का सबसे तेज़ शिकारी माना जाने वाला पेरेग्राइन बाज़ बहुमंज़िला इमारतों के बीच गोते लगाता दिख जाएगा.
एक दौर ऐसा भी था, जब पेरेग्राइन बाज़ को विलुप्त मान लिया गया था. लेकिन, अब ये न्यूयॉर्क की बहुमंज़िला इमारतों के बीच अक्सर उड़ता दिख जाता है.
जंगली जीवों का शहरों में दिखना यूं ही नहीं हो रहा है. इसके लिए इन शहरों में ख़ास प्रोजेक्ट चलाए जा रहे हैं. इन्हें अंग्रेज़ी में 'अर्बन रिवाइल्डिंग प्रोजेक्ट' यानी शहरों का जंगलीकरण कहते हैं. अब ऊंची इमारतों की छतों पर हरित पट्टियां विकसित की जा रही हैं. ताकि शहरियों के बीच ये जंगली जीव भी आबाद हो सकें. एक ऐसे ही प्रोजेक्ट के तहत दफ़्तर में मधुमक्खियों का छत्ता लगाने का काम हो रहा है.
लंदन की आर्किटेक्ट एमिली वुडैसन ऐसे ही प्रोजेक्ट डिज़ाइन करती हैं. एमिली कहती हैं कि आप को शहर की बनावट और बसावट को पूरी तरह बदलनी ज़रूरत नहीं है. बस इमारतों के जंगल के बीच हरियाली विकसित करने की ज़रूरत है. ऐसा घरों की छतों, बहुमंज़िला इमारतों के टैरेस और दीवारों पर भी हो सकता है.
लंदन में ज़मीन के छह बड़े मालिकों के साथ मिलकर द वाइल्ड वेस्ट एंड प्रोजेक्ट चलाया जा रहा है. इसके तहत हर सौ मीटर की दूरी पर हरियाली वाली पट्टी विकसित की जा रही है, जिसका दायरा क़रीब 100 वर्ग मीटर होगा.
एमिली कहती हैं कि ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है. इसके तहत लंदन के पार्कों को जोड़ने वाली हरित पट्टी विकसित करने की योजना है.
हरियाली भरी पट्टियां विकसित करने के साथ बहुत से ज़मीन मालिक मौजूदा इमारतों में ही हरी-भरी दीवार और छतें विकसित कर रहे हैं. मतलब ये कि दीवारों पर ही हरियाली उगाई जा रही है और छतों में छोटे बागीचे लगाए जा रहे हैं. अब तक जो प्रगति है, उससे लगता है कि ये नुस्खे काम आ रहे हैं. इन कोशिशों का ही नतीजा है कि लंदन से ग़ायब हो चुके कई जीव वापस दिखने लगे हैं. ब्लैक रेडस्टार्ट इसका एक नमूना है.
एमिली कहती हैं कि, 'हम दूसरे जीवों को लुभाने के लिए शहरों में चट्टानों या लकड़ी का ढेर लगा सकते हैं. इससे कई तरह के कीड़े शहरों की तरफ़ आएंगे. दूसरी प्रजातियां भी इस तरह से शहरों में आबाद होंगी. किसी पक्षी के रहने के लिए ये ठिकाने आदर्श जगह बन सकते हैं.'
जंगली और दुर्लभ जीवों को शहरों की तरफ़ आकर्षित करना सिर्फ़ अच्छा महसूस होना भर नहीं है. इससे शहरी जीव में विविधता आती है. शहर का नज़ारा दिलकश होता है. ऐसे प्रोजेक्ट से शहर की तरफ़ आकर्षित किए गए जीव हमारी खाद्य सुरक्षा के लिए बहुत अहम हैं. ये वो जीव हैं, जो फलों और सब्ज़ियों के परागण में अहम रोल निभाते हैं. जैसे कि मधुमक्खियां और तितलियां.
दुनिया भर में तितलियों और मधुमक्खियों की तादाद में भारी गिरावट देखी जा रही है.
पर्यावरण के साथ आर्किटेक्ट की प्लानिंग करने वाली कंपनी टेरेफॉर्म के निदेशक मिशेल जोआचिम कहते हैं कि, 'हमें ये एहसास हो रहा है कि योजना बनाने, विकास करने, आर्किटेक्चर और औद्योगिक डिज़ाइन ने मिलकर बहुत से जीवों की नस्ल पर तबाही बरपायी है. हम शहरों का जंगलीकरण कर के, इमारतों की प्लानिंग में बदलाव कर के शहरों को जंगली जीवों के रहने लायक़ बना सकते हैं.'
कई बार इसके लिए आठ मंज़िला पारदर्शी चरागाह विकसित करने जैसा काम भी हो सकता है न्यूयॉर्क के मैनहट्टन इलाक़े में ऐसा ही चरागाह विकसित किया गया है.
इसी तरह उत्तरी अमरीका की मोनार्च तितलियां ख़ात्मे के कगार पर हैं. 1980 के दशक के बाद से ही मिल्कवीड नाम के एक जंगली पौधे को हटाने पर लोगों के ज़ोर देने की वजह से ये शाही तितलियां भी ख़त्म हो रही हैं. वजह ये है कि शाही तितलियां इस मिल्कवीड पौधे पर ही प्रजनन करती हैं और अपने बच्चे पालती हैं.
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